वर्ष २००९ भारत के लिए खेलों के लिहाज़ से उपलब्धियों भरा रहा ,हर खेल में भारत की जय होती रही अगर इस लेख की शुरुवात क्रिकेट से नहीं की तो बेमानी होगी .....क्योंकि भारत में धर्म का दर्जा रखने वाले इस खेल में अंततः हम शिखर पर पहुँच गए,हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई टेस्ट श्रृंखला के आखिरी मैच को मुंबई में जीतकर हम टेस्ट क्रिकेट के सरताज बन गए ..१९३२ में टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू करने के बाद हमें इस मुकाम पर पहुँचने में ७७ साल लग गए ...लेकिन अंत भला तो सब भला ,क्रिकेट की बुलंदियों पर पहुंचा भारत उसके पुरस्कारों से कैसे दूर हो सकता है ,आई सी सी के इस वर्ष के पुरस्कारों में भारतीय खिलाडियों का ही बोल बाला रहा गौतम गंभीर को आई सी सी टेस्ट प्लेअर ऑफ़ द इयर ,कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को आई सी सी वंडे प्लेअर ऑफ़ द इयर के पुरस्कार से नवाज़ा गया.भारतीय क्रिकेट की बात बिना सचिन तेंदुलकर के कैसे पूरी हो सकती है इसी साल उन्होंने अपने क्रिकेटिंग कैरियर के २० साल पूरे किये इसके साथ ही वो अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में ३०००० रन और एकदिवसीय मैचों में १७००० रन बनाने वाले पहले खिलाडी बने
Sunday, January 3, 2010
Friday, January 1, 2010
नववर्ष की प्रभात
दोस्तों आज से नए साल की शुरुवात हो गई है हम सभी ने अपने अपने तरीके से इसका स्वागत किया ....मैंने भी इस पल को चन्द पंक्तियों में समेटने की कोशिश की है 

नव वर्ष के आगाज़ का ,
नव स्वप्न के आधार का ,
खुशियों की बरसात का ,
ख्वाहिशों के आकार का,
इंतज़ार है नई सौगात का ,
नववर्ष की नई प्रभात का
Saturday, May 23, 2009
फिर वही ब्लैकमेल की राजनीति
इस बार चुनावी समर ख़त्म होने का नाम ही नही ले रहा है ,कल मनमोहन सिंह जी ने १९ मंत्रियों के साथ दूसरी बार देश चलाने की जिम्मेदारी सम्हाल ली है .पिछली बार जिन्होंने अंत तक सरकार का साथ दिया वही आज अपने स्वार्थ के लिए देश को परेशानी मैं डालने के लिएतैयार बैठे हैं .इसका कारणसिर्फ़ एक है कि कांग्रेस इस बार सिर्फ़ साफ़ सुथरी छवि के नेताओं को ही मंत्री पद देना चाहती है ,साथ ही भारतीय राजनीति को भाई भतीजावाद से दूर ले जाना चाहती है ,करूणानिधिजी इस बार परिवार का मोह त्याग नही पा रहे हैं यही उन्हें
Thursday, March 26, 2009
yuva netaon ko tikat kyon nahi ???
भारतवर्ष फिर चुनावी समर के लिए रण भूमि बनने को तैयार हो गया है ,लगभग सभी छोटी बड़ी पार्टियों ने आपने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है ,कुछ चेहरे जाने पहचाने हैं तो कुछ बिलकुल अनजान .लेकिन भारत का मतदाता नहीं बदला ....लेकिन मतदाताओं का पैटर्न बदल गया है ....अब भारत युवाओं का देश कहलाता है तो लाजमी है की दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का भविष्य भी इन्ही के हांथो में है ...पार्टियों की उम्मीदवारों की सूची में भले ही इनकी जगह नगण्य हो लेकिन पंद्रहवी लोकसभा की तक़दीर का फैसला तो ये युवा ही करेंगे ...शायद इसीलिए लाल कृष्ण अडवाणी जैसे नेता भी अपने आपको युवाओं से जोड़ने के लिए वेब पोर्टल का सहारा ले रहे हैं ...चिन्तसिर्फ कुर्सी पाने की है न की देश की बागडोर युवाओं के हांथो में देने की न ही उनके उद्धार की ...आज बदलती तकनीक के साथ युवाओं की जरूरतें भी बदल रही है और इन जरूरतों का ध्यान उनकी उम्र का शख्स ही अच्छे तरह से सकता है ..तो फिर अच्छे युवा नेताओ को मौका क्यो नही दिया जाता है यही मेरी चिंता है
आप क्या सोचते हैं हमे बताऎ
आप क्या सोचते हैं हमे बताऎ
Wednesday, March 25, 2009
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